1 नवंबर से लागू होगा नियम, 10 साल अनुभवी वरिष्ठ अधिवक्ता का प्रमाण-पत्र होगा अनिवार्य
प्रतापगढ़/प्रयागराज – वकालत की दुनिया में कदम रखने वाले नए अधिवक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। अब एलएलबी की डिग्री मिलते ही सीधे प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने नए अधिवक्ताओं के लिए 6 महीने की इंटर्नशिप अनिवार्य कर दी है।
बार काउंसिल की 10 अक्टूबर को हुई सामान्य बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया है। इसकी जानकारी सचिव आर.के. शुक्ल ने मंगलवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी। यह नियम आगामी 1 नवंबर 2025 से लागू हो जाएगा।
क्या है नया नियम –
बार काउंसिल के सचिव के अनुसार, रजिस्ट्रेशन के बाद जब अभ्यर्थी सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) के लिए आवेदन करेगा, उससे पहले उसे 6 महीने तक किसी वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ ट्रेनी के रूप में काम करना होगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता के लिए भी शर्त है कि उसकी अपनी प्रैक्टिस कम से कम 10 साल की होनी चाहिए और उसके पास खुद का COP होना जरूरी है। 6 महीने की ट्रेनिंग पूरी होने पर वरिष्ठ अधिवक्ता अपने लेटर हेड पर प्रमाण-पत्र देंगे, जिसे काउंसिल के किसी सदस्य से सत्यापित कराकर पोर्टल पर अपलोड करना होगा। बिना इस प्रमाण-पत्र के COP जारी नहीं होगा।
फर्जीवाड़ा रोकने को सख्ती –
प्रमाण-पत्रों के दुरुपयोग को रोकने के लिए काउंसिल ने सख्त नियम बनाया है। एक वरिष्ठ अधिवक्ता एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 3 ट्रेनी अधिवक्ताओं को ही प्रमाण-पत्र दे सकेगा। इससे अधिक प्रमाण-पत्र देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुमोदन की प्रत्याशा में लागू की गई है। जो अभ्यर्थी 1 नवंबर से पहले COP के लिए आवेदन कर चुके हैं, उन पर यह नया नियम लागू नहीं होगा।
ब्यूरो रिपोर्ट – भारत दैनिक
